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mahabharat 14.97.d26: यमलोक के मार्ग पर कभी भयभीत होकर, कभी पागल होकर, कभी लड़खड़ाते हुए और कभी दर्द से रोते-चीखते हुए चलना पड़ता है।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.97.d26 
क्वचिद्भीतै: क्वचिन्मत्तै: प्रस्खलद्भि: क्वचित् क्वचित् ।
क्रन्दद्भिर्वेदनार्तैस्तु गन्तव्यं यमसादनम्॥
 
 
अनुवाद
यमलोक के मार्ग पर कभी भयभीत होकर, कभी पागल होकर, कभी लड़खड़ाते हुए और कभी दर्द से रोते-चीखते हुए चलना पड़ता है।
 
On the path to Yamaloka, one has to walk sometimes in fear, sometimes going mad, sometimes stumbling and sometimes crying and screaming in pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)