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mahabharat 14.97.d1: युधिष्ठिर ने पूछा- हे दैत्यों का नाश करने वाले देवराज! मैं यह सुनने के लिए अत्यंत उत्सुक हूँ। मैं आपका भक्त हूँ। केशव! आप सर्वज्ञ हैं, अतः कृपा करके मुझे बताइए कि मनुष्यलोक और यमलोक के बीच कितनी दूरी है?   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  14.97.d1 
युधिष्ठिर उवाच
देवदेवेश दैत्यघ्न परं कौतूहलं हि मे।
एतत् कथय सर्वज्ञ त्वद्भक्तस्य च केशव।
मानुषस्य च लोकस्य धर्मलोकस्य चान्तरम्॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- हे दैत्यों का नाश करने वाले देवराज! मैं यह सुनने के लिए अत्यंत उत्सुक हूँ। मैं आपका भक्त हूँ। केशव! आप सर्वज्ञ हैं, अतः कृपा करके मुझे बताइए कि मनुष्यलोक और यमलोक के बीच कितनी दूरी है?
 
Yudhishthira asked- O Lord of the gods who destroy demons! I am very eager to hear this. I am your devotee. Keshav! You are omniscient, so please tell me, what is the distance between the world of humans and the world of Yama?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)