Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.96.d6: जो ब्राह्मण उचित रीति से ब्रह्मचर्य का पालन करता है, जिसका ब्रह्मचर्य व्रत कभी खंडित नहीं होता, उसे बीज समझना चाहिए, उसका बीज ही शुभ है।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  14.96.d6 
अविप्लुतब्रह्मचर्यो यस्तु विप्रो यथाविधि।
स बीजं नाम विज्ञेयं तस्य बीजं शुभं भवेत् ॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण उचित रीति से ब्रह्मचर्य का पालन करता है, जिसका ब्रह्मचर्य व्रत कभी खंडित नहीं होता, उसे बीज समझना चाहिए, उसका बीज ही शुभ है।
 
A Brahmin who follows celibacy in a proper manner, whose vow of celibacy is never broken, should be considered as a seed, only his seed is auspicious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)