Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.96.d5: श्री भगवान बोले - राजन! बीज और योनि की पवित्रता और अपवित्रता का यथार्थ वर्णन सुनो। पाण्डुनन्दन! यह संसार अपनी पवित्रता के कारण ही जीवित रहता है और अपनी अपवित्रता के कारण ही इसका नाश होता है। | mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री भगवान बोले - राजन! बीज और योनि की पवित्रता और अपवित्रता का यथार्थ वर्णन सुनो। पाण्डुनन्दन! यह संसार अपनी पवित्रता के कारण ही जीवित रहता है और अपनी अपवित्रता के कारण ही इसका नाश होता है।
Shri Bhagavan said – King! Listen to the exact description of seed and vaginal purity and impurity. Pandunandan! This world survives only due to its purity and due to its impurity it gets destroyed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥