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mahabharat 14.96.d49: भारत! जो लोग ब्राह्मणों को डाँटते और गालियाँ देते हैं, वे वास्तव में मुझे ही गालियाँ और फटकार लगाते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.96.d49 
तर्जयन्ति च ये विप्रान् क्रोशयन्ति च भारत।
आक्रुष्टस्तर्जितश्चाहं तैर्भवामि न संशय:॥
 
 
अनुवाद
भारत! जो लोग ब्राह्मणों को डाँटते और गालियाँ देते हैं, वे वास्तव में मुझे ही गालियाँ और फटकार लगाते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है।
 
Bharat! Those who scold and abuse the Brahmins are actually abusing and reprimanding me. There is no doubt about this.
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)