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mahabharat 14.96.d48: जो श्रेष्ठ पुरुष मधुर वाणी से ब्राह्मणों का पूजन करते हैं, वे निःसंदेह मेरी ही पूजा और स्तुति करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन  »  श्लोक d48
 
 
श्लोक  14.96.d48 
ये विप्रान् श्लक्ष्णया वाचा पूजयन्ति नरोत्तमा:।
अर्चितश्च स्तुतश्चैव तैर्भवामि न संशय:॥
 
 
अनुवाद
जो श्रेष्ठ पुरुष मधुर वाणी से ब्राह्मणों का पूजन करते हैं, वे निःसंदेह मेरी ही पूजा और स्तुति करते हैं।
 
Those noble men who worship the Brahmins with sweet words, they are undoubtedly performing my worship and praise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)