Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.96.d47: इसलिए ब्राह्मणों के प्रति कभी भी कोई अशुभ बात न कहें। उनसे कभी भी कठोर या रूखे ढंग से बात न करें। उनका कभी भी अपमान न करें।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन  »  श्लोक d47
 
 
श्लोक  14.96.d47 
तस्मान्नाकुशलं ब्रूयान्न शुष्कां गतिमीरयेत्।
न ब्रूयात् परुषां वाणीं न चैवैनानतिक्रमेत्॥
 
 
अनुवाद
इसलिए ब्राह्मणों के प्रति कभी भी कोई अशुभ बात न कहें। उनसे कभी भी कठोर या रूखे ढंग से बात न करें। उनका कभी भी अपमान न करें।
 
Therefore, never say anything inauspicious to Brahmins. Never speak harshly or rudely to them. Never insult them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)