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mahabharat 14.96.d39: बहुत से अज्ञानी लोग यह नहीं जानते कि मैं इस पृथ्वी पर ब्राह्मण रूप में निवास करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.96.d39 
बहवस्तु न जानन्ति नरा ज्ञानबहिष्कृता:।
यदहं द्विजरूपेण वसामि वसुधातले॥
 
 
अनुवाद
बहुत से अज्ञानी लोग यह नहीं जानते कि मैं इस पृथ्वी पर ब्राह्मण रूप में निवास करता हूँ।
 
Many ignorant people do not know that I reside on this earth in the form of brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)