Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.96.d37: ब्राह्मण चाहे कुबड़े हों, एकनेत्र वाले हों, बौने हों, दरिद्र हों, रोगी हों, तो भी विद्वानों को उनका अपमान नहीं करना चाहिए; क्योंकि वे सब मेरे ही स्वरूप हैं। | mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुब्जा: काणा वामनाश्च दरिद्रा व्याधितास्तथा।
नावमान्या द्विजा: प्राज्ञैर्मम रूपा हि ते द्विजा:॥
अनुवाद
ब्राह्मण चाहे कुबड़े हों, एकनेत्र वाले हों, बौने हों, दरिद्र हों, रोगी हों, तो भी विद्वानों को उनका अपमान नहीं करना चाहिए; क्योंकि वे सब मेरे ही स्वरूप हैं।
Even if the brahmins are hunchbacked, one-eyed, dwarf, poor or sick, the learned men should never insult them; because they are all my manifestation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥