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mahabharat 14.96.d30: प्रतिदिन एक हज़ार गायत्री मंत्र का जप करना उत्तम है, सौ मंत्र का जप मध्यम माना गया है और दस मंत्र का जप अधम माना गया है। कुन्ती नंदन! गायत्री सभी पापों का नाश करती है, इसलिए इसका सदैव जप करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.96.d30 
सहस्रपरमां देवीं शतमध्यां शतावराम्।
सावित्रीं जप कौन्तेय सर्वपापप्रणाशिनीम्॥
 
 
अनुवाद
प्रतिदिन एक हज़ार गायत्री मंत्र का जप करना उत्तम है, सौ मंत्र का जप मध्यम माना गया है और दस मंत्र का जप अधम माना गया है। कुन्ती नंदन! गायत्री सभी पापों का नाश करती है, इसलिए इसका सदैव जप करना चाहिए।
 
Chanting one thousand Gayatri Mantras every day is the best, chanting a hundred mantras is considered medium and chanting ten mantras is considered inferior. Kunti Nandan! Gayatri destroys all sins, so you should always chant it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)