Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.96.d29: यदि कोई ब्राह्मण, जो सदाचार से भ्रष्ट है और चारों वेदों का ज्ञाता भी है, तो भी वह निन्दनीय है। किन्तु यदि कोई ब्राह्मण सदाचारी है और केवल गायत्री मंत्र का जप करता है, तो वह श्रेष्ठ माना जाता है। | mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नायन्त्रितश्चतुर्वेदी शीलभ्रष्ट: स कुत्सित:।
शीलवृत्तसमायुक्त: सावित्रीपाठको वर:॥
अनुवाद
यदि कोई ब्राह्मण, जो सदाचार से भ्रष्ट है और चारों वेदों का ज्ञाता भी है, तो भी वह निन्दनीय है। किन्तु यदि कोई ब्राह्मण सदाचारी है और केवल गायत्री मंत्र का जप करता है, तो वह श्रेष्ठ माना जाता है।
Even if a Brahmin who is corrupt from rules and moral conduct is a scholar of all the four Vedas, he is still worthy of condemnation. However, if a Brahmin who is endowed with good conduct and only chants the Gayatri Mantra is considered to be the best.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥