Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.96.d27: पाण्डवों! जिस प्रकार मधुमक्खियाँ खिले हुए फूलों से मधु का सार ले लेती हैं, उसी प्रकार समस्त वेदों से गायत्री का सार ले लिया गया है। | mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा विकसिते पुष्पे मधु गृह्णन्ति षट्पदा:।
एवं गृहीता सावित्री सर्ववेदे च पाण्डव॥
अनुवाद
पाण्डवों! जिस प्रकार मधुमक्खियाँ खिले हुए फूलों से मधु का सार ले लेती हैं, उसी प्रकार समस्त वेदों से गायत्री का सार ले लिया गया है।
Pandavas! Just as the bees take the essence of honey from the blooming flowers, in the same way the essence of Gayatri has been taken from all the Vedas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥