Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.96.d21: युधिष्ठिर! जो ब्राह्मण न तो ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, न वेदों का अध्ययन करते हैं, जो अशुभ फल देने वाले कर्मों का सहारा लेते हैं, वे नाममात्र के ब्राह्मण भी गायत्री मंत्र का जप करके पूज्य हो जाते हैं। फिर उन ब्राह्मणों के विषय में क्या कहा जा सकता है जो प्रातः और सायं संध्यावंदन करते हैं? | mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर! जो ब्राह्मण न तो ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, न वेदों का अध्ययन करते हैं, जो अशुभ फल देने वाले कर्मों का सहारा लेते हैं, वे नाममात्र के ब्राह्मण भी गायत्री मंत्र का जप करके पूज्य हो जाते हैं। फिर उन ब्राह्मणों के विषय में क्या कहा जा सकता है जो प्रातः और सायं संध्यावंदन करते हैं?
Yudhishthira! Those Brahmins who neither follow celibacy nor study the Vedas, who resort to actions that bring bad results, even those Brahmins in name become worship-worthy by chanting Gayatri Mantra. Then what can be said about those Brahmins who do Sandhya Vandan in the morning and evening?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥