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mahabharat 14.96.d20: जो मनुष्य वैदिक व्रतों का पालन करते हैं, वे पृथ्वी पर दूसरों को पवित्र करने वाले हैं। हे राजन! गायत्री चारों वेदों में सर्वश्रेष्ठ है।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.96.d20 
पुनन्तीह पृथिव्यां च चीर्णवेदव्रता नरा:।
चतुर्णामपि वेदानां सा हि राजन् गरीयसी॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य वैदिक व्रतों का पालन करते हैं, वे पृथ्वी पर दूसरों को पवित्र करने वाले हैं। हे राजन! गायत्री चारों वेदों में सर्वश्रेष्ठ है।
 
Men who perform Vedic vows are the ones who purify others on earth. O King! Gayatri is the best among the four Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)