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mahabharat 14.96.d19: यदि वह ऐसे स्थान पर भी चला जाए जहाँ क्रूर कर्म करने वाले भयंकर, विशाल राक्षस निवास करते हों, तो भी वे उस ब्राह्मण को हानि नहीं पहुँचा सकते।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  14.96.d19 
यत्र यत्र स्थिताश्चैव दारुणा: पिशिताशना:।
घोररूपा महाकाया धर्षयन्ति न तं द्विजम्॥
 
 
अनुवाद
यदि वह ऐसे स्थान पर भी चला जाए जहाँ क्रूर कर्म करने वाले भयंकर, विशाल राक्षस निवास करते हों, तो भी वे उस ब्राह्मण को हानि नहीं पहुँचा सकते।
 
Even if he goes to a place where terrible, huge demons who perform cruel acts reside, they cannot harm that Brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)