Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.96.d17: जो ब्राह्मण वेदों की माता, सबको पवित्र करने वाली गायत्री देवी का नाम जपता है, उसे दान लेने में कोई दोष नहीं लगता, भले ही उसे समुद्र पर्यन्त पृथ्वी दान में मिल जाए। | mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो जपेत् पावनीं देवीं गायत्रीं वेदमातरम्।
न सीदेत् प्रतिगृह्णान: पृथिवीं च ससागराम्॥
अनुवाद
जो ब्राह्मण वेदों की माता, सबको पवित्र करने वाली गायत्री देवी का नाम जपता है, उसे दान लेने में कोई दोष नहीं लगता, भले ही उसे समुद्र पर्यन्त पृथ्वी दान में मिल जाए।
A Brahmin who chants the name of Gayatri Devi, the mother of the Vedas, who purifies everyone, is not troubled by the defect in receiving gifts even if he receives the earth up to the ocean as a gift.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥