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mahabharat 14.96.d14: ब्रह्मचर्य का पालन करने से मनुष्य आयु, तेज, बल, वीर्य, ​​बुद्धि, धन, यश, पुण्य और मेरा प्रेम प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  14.96.d14 
आयुस्तेजो बलं वीर्यं प्रज्ञा श्रीश्च महद् यश:।
पुण्यं च मत्प्रियत्वं च लभते ब्रह्मचर्यया॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मचर्य का पालन करने से मनुष्य आयु, तेज, बल, वीर्य, ​​बुद्धि, धन, यश, पुण्य और मेरा प्रेम प्राप्त करता है।
 
By observing celibacy a man obtains age, brilliance, strength, semen, wisdom, wealth, great fame, virtue and my love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)