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mahabharat 14.96.d13: वीर्य को आत्मा कहा गया है। यह सबसे बड़ा देवता है। इसलिए, व्यक्ति को अपने वीर्य की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.96.d13 
आत्मा हि शुक्रमुद्दिष्टं दैवतं परमं महत्।
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन निरुन्ध्याच्छुक्रमात्मन:॥
 
 
अनुवाद
वीर्य को आत्मा कहा गया है। यह सबसे बड़ा देवता है। इसलिए, व्यक्ति को अपने वीर्य की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
 
Semen is said to be the soul. It is the greatest deity. Therefore, one must make every effort to protect his semen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)