Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.96.d11: जो यहाँ-वहाँ किसी भी स्त्री के साथ, यहाँ तक कि शूद्र जाति की स्त्री के साथ भी संभोग करता है, वह पापी और स्वेच्छाचारी कहलाता है। उसका बीज अशुभ होता है। | mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो यत्र तत्र वा रेत: सिक्त्वा शूद्रासु वा चरेत्।
कामचारी स पापात्मा बीजं तस्याशुभं भवेत्॥
अनुवाद
जो यहाँ-वहाँ किसी भी स्त्री के साथ, यहाँ तक कि शूद्र जाति की स्त्री के साथ भी संभोग करता है, वह पापी और स्वेच्छाचारी कहलाता है। उसका बीज अशुभ होता है।
He who has sexual intercourse with any woman here and there or even with a woman of the Shudra caste is called a sinner and willful. His seed is inauspicious.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥