तावुभौ गूहितौ सम्यग् वृद्धिं यातो न संशय:।
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन न पापं गूहयेद् बुध:॥
तस्मादेतत् प्रयत्नेन कीर्तयेत् क्षयकारणात् ॥
तस्मात् संकीर्तयेत् पापं नित्यं धर्मं च गूहयेत् ॥
अनुवाद
निस्संदेह, ये दोनों ही छिपाने पर और भी बढ़ जाते हैं। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि अपने पापों को प्रकट करने का भरसक प्रयास करे, उन्हें छिपाने का प्रयास न करे। पापों का उल्लेख करने से पापों का नाश होता है, इसलिए पापों को सदैव प्रकट करना चाहिए और धर्म को गुप्त रखना चाहिए।
Undoubtedly both of these increase more when hidden. Therefore a wise person should make every effort to reveal his sins and not try to hide them. The mention of sins leads to the destruction of sins, therefore sins should always be revealed and Dharma should be kept secret.
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥