श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 94: चारों वर्णोंके कर्म और उनके फलोंका वर्णन तथा धर्मकी वृद्धि और पापके क्षय होनेका उपाय  »  श्लोक d10
 
 
श्लोक  14.94.d10 
युधिष्ठिर उवाच
कीदृशी ब्राह्मणस्याथ क्षत्रियस्यापि कीदृशी।
वैश्यस्य कीदृशी देव गति: शूद्रस्य कीदृशी॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा-देवेश्वर! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की अलग-अलग स्थिति क्या है?
 
Yudhishthir asked – Deveshwar! What is the different status of Brahmin, Kshatriya, Vaishya and Shudra?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)