Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.93.d63: हे राजन! इस प्रकार देवता, दानव और मनुष्य सहित सम्पूर्ण जगत् मुझसे उत्पन्न होता है और मुझमें ही लय हो जाता है।'   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d63
 
 
श्लोक  14.93.d63 
एवं सर्वं जगदिदं सदेवासुरमानुषम्।
मत्त: प्रभवते राजन् मय्येव प्रविलीयते॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस प्रकार देवता, दानव और मनुष्य सहित सम्पूर्ण जगत् मुझसे उत्पन्न होता है और मुझमें ही लय हो जाता है।'
 
O King! In this manner the entire universe including the gods, demons and humans is born from me and dissolves in me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)