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mahabharat 14.93.d53: मैंने अपने तेज और तप से चारों प्रकार के जीवों को प्रेमरूपी रस्सी से बांधकर अपनी माया से उन्हें जकड़ रखा है।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d53 
तेजसा तपसा चाहं भूतग्रामं चतुर्विधम्॥
स्नेहपाशैर्गुणैर्बद्‍ध्वा धारयाम्यात्ममायया।
 
 
अनुवाद
मैंने अपने तेज और तप से चारों प्रकार के जीवों को प्रेमरूपी रस्सी से बांधकर अपनी माया से उन्हें जकड़ रखा है।
 
With my brilliance and penance, I have tied the four types of living beings with a rope of love and have held them together with my illusion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)