Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.93.d45: आठ दिशाएँ मेरी भुजाएँ हैं, तारे मेरे आभूषण हैं और समस्त प्राणियों को स्थान देने वाला आकाश मेरा वक्षस्थल है। बादलों के मार्ग और वायु को मेरा अविनाशी उदर समझो।' | mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिशो मे बाहवश्चाष्टौ नक्षत्राणि च भूषणम्।
अन्तरिक्षमुरो विद्धि सर्वभूतावकाशकम्।
मार्गो मेघानिलाभ्यां तु यन्ममोदरमव्ययम्॥
अनुवाद
आठ दिशाएँ मेरी भुजाएँ हैं, तारे मेरे आभूषण हैं और समस्त प्राणियों को स्थान देने वाला आकाश मेरा वक्षस्थल है। बादलों के मार्ग और वायु को मेरा अविनाशी उदर समझो।'
‘The eight directions are my arms, the stars are my ornaments and the space that provides space for all beings is my chest. Consider the path of the clouds and the wind as my indestructible stomach.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥