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mahabharat 14.93.d35: पाण्डुपुत्र! मेरे भक्त कभी नाश नहीं होते, वे पापरहित होते हैं। मनुष्यों में केवल मेरे भक्त ही सफल जन्म पाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d35 
मद्भक्ता न विनश्यन्ति मद्भक्ता वीतकल्मषा:।
मद्भक्तानां तु मानुष्ये सफलं जन्म पाण्डव॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! मेरे भक्त कभी नाश नहीं होते, वे पापरहित होते हैं। मनुष्यों में केवल मेरे भक्त ही सफल जन्म पाते हैं।
 
‘Son of Pandu! My devotees never perish, they are sinless. Among humans, only those who are my devotees are blessed with a successful birth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)