Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.93.d34: इसके विपरीत, जो ज्ञानदृष्टि से मुझे समस्त प्राणियों में स्थित देखते हैं, वे मेरे भक्त हैं जिनका मन सदैव मुझमें ही लगा रहता है। ऐसे भक्तों को मैं परमधाम में अपने पास बुलाता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  14.93.d34 
ये च मां सर्वभूतस्थं पश्यन्ति ज्ञानचक्षुषा।
मद्भक्तांस्तान् सदा युक्तान् मत्समीपं नयाम्यहम्॥
 
 
अनुवाद
इसके विपरीत, जो ज्ञानदृष्टि से मुझे समस्त प्राणियों में स्थित देखते हैं, वे मेरे भक्त हैं जिनका मन सदैव मुझमें ही लगा रहता है। ऐसे भक्तों को मैं परमधाम में अपने पास बुलाता हूँ।
 
On the contrary, those who, with the vision of knowledge, see Me present in all beings, are My devotees whose minds are always focused on Me. I call such devotees to Me in the Supreme Abode.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)