vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन
»
श्लोक d32
श्लोक
14.93.d32
इदं मे मानुषं जन्म कृतमात्मनि मायया।
धर्मसंस्थापनार्थाय दुष्टानां नाशनाय च॥
अनुवाद
इस समय धर्म की स्थापना तथा दुष्टों का नाश करने के लिए मैंने अपनी माया से मानव शरीर में अवतार लिया है।
At this time, I have incarnated in a human body through my illusion to establish religion and destroy the wicked.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×