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mahabharat 14.93.d32: इस समय धर्म की स्थापना तथा दुष्टों का नाश करने के लिए मैंने अपनी माया से मानव शरीर में अवतार लिया है।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d32 
इदं मे मानुषं जन्म कृतमात्मनि मायया।
धर्मसंस्थापनार्थाय दुष्टानां नाशनाय च॥
 
 
अनुवाद
इस समय धर्म की स्थापना तथा दुष्टों का नाश करने के लिए मैंने अपनी माया से मानव शरीर में अवतार लिया है।
 
At this time, I have incarnated in a human body through my illusion to establish religion and destroy the wicked.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)