Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.93.d31: ‘तुम मुझे अत्यंत प्रिय हो और सदैव मेरी शरण में रहो। यदि तुम पूछो तो मैं आत्मा के परम गुप्त तत्त्व का वर्णन कर सकता हूँ, फिर धर्म की संहिता के विषय में क्या कहा जा सकता है? | mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘तुम मुझे अत्यंत प्रिय हो और सदैव मेरी शरण में रहो। यदि तुम पूछो तो मैं आत्मा के परम गुप्त तत्त्व का वर्णन कर सकता हूँ, फिर धर्म की संहिता के विषय में क्या कहा जा सकता है?
‘You are very dear to me and always stay in my refuge. If you ask, I can describe the most secret essence of the soul, then what can be said about the code of religion?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥