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mahabharat 14.93.d30: कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर! अब मैं तुम्हें एक रहस्य की बात बताता हूँ, सुनो। पाण्डुनन्दन! मैं तुम्हारे भक्त को अवश्य ही परम धर्म का वर्णन करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d30 
इदं रहस्यं कौन्तेय शृणु धर्ममनुत्तमम्।
कथयिष्ये परं धर्मं तव भक्तस्य पाण्डव॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर! अब मैं तुम्हें एक रहस्य की बात बताता हूँ, सुनो। पाण्डुनन्दन! मैं तुम्हारे भक्त को अवश्य ही परम धर्म का वर्णन करूँगा।
 
Kuntiputra Yudhishthir! Now let me tell you a secret, listen. Pandunandan! I will definitely describe the ultimate religion to your devotee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)