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mahabharat 14.93.d3: उस समय वशिष्ठजी, बुद्धिमान तपस्वी ऋषिगण तथा अन्य भक्तगण उस परम गोपनीय तथा उत्तम वैष्णव धर्म को सुनने की इच्छा से भगवान श्रीकृष्ण के चारों ओर बैठ गये।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d3 
वशिष्ठाद्यास्तपोयुक्ता मुनयस्तत्त्वदर्शिन:।
श्रोतुकामा: परं गुह्यं वैष्णवं धर्ममुत्तमम्।
तथा भागवताश्चैव ततस्तं पर्यवारयन्॥
 
 
अनुवाद
उस समय वशिष्ठजी, बुद्धिमान तपस्वी ऋषिगण तथा अन्य भक्तगण उस परम गोपनीय तथा उत्तम वैष्णव धर्म को सुनने की इच्छा से भगवान श्रीकृष्ण के चारों ओर बैठ गये।
 
At that time, Vashishtha, the wise ascetic sages and other devotees sat around Lord Krishna with the desire to listen to that most secret and excellent Vaishnav religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)