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mahabharat 14.93.d27: जो लोग आज निंदित, दरिद्र, कुरूप, रोगी, दूसरों द्वारा घृणास्पद और मूर्ख के रूप में देखे जाते हैं, उन्होंने अपने पिछले जन्मों में धर्म के अनुष्ठान नहीं किए हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d27 
कुत्सिता ये दरिद्राश्च विरूपा व्याधितास्तथा।
परद्वेष्याश्च मूर्खाश्च न तैर्धर्म: कृत: पुरा॥
 
 
अनुवाद
जो लोग आज निंदित, दरिद्र, कुरूप, रोगी, दूसरों द्वारा घृणास्पद और मूर्ख के रूप में देखे जाते हैं, उन्होंने अपने पिछले जन्मों में धर्म के अनुष्ठान नहीं किए हैं।
 
‘Those people who are seen today as condemned, poor, ugly, sick, hated by others and fools, have not performed the rituals of Dharma in their previous lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)