श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  14.93.d25 
यदा च क्षीयते पापं कालेन पुरुषस्य तु।
तदा संजायते बुद्धिर्धर्मं कर्तुं युधिष्ठिर॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जब मनुष्य के पाप कालान्तर में नष्ट हो जाते हैं, तभी उसकी बुद्धि धर्माचरण में प्रवृत्त होती है।
 
Yudhishthira! When a man's sins are destroyed over a period of time, only then does his intellect get engaged in practising Dharma.
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