श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d22
 
 
श्लोक  14.93.d22 
धर्म: पिता च माता च धर्मो नाथ: सुहृत् तथा।
धर्मो भ्राता सखा चैव धर्म: स्वामी परंतप॥
 
 
अनुवाद
परंतप! धर्म ही आत्मा का माता-पिता, रक्षक, मित्र, बंधु, मित्र और स्वामी है।
 
‘Parantap! Religion itself is the parent, protector, friend, brother, friend and master of the soul.
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