श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  14.93.d20 
एवं ते यस्य कौन्तेय यत्नो धर्मेषु सुव्रत।
तस्य ते दुर्लभो लोके न कश्चिदपि विद्यते॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले कुन्तीनन्दन! आप धर्म के लिए इतना परिश्रम करते हैं, इसीलिए संसार में आपके लिए कोई वस्तु दुर्लभ नहीं है।
 
Kuntinandan, the one who observes the best fast! You work so hard for religion, that is why nothing is scarce for you in the world.
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