श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  14.93.d2 
वैशम्पायन उवाच
पश्चिमेनाश्वमेधेन यदा स्नातो युधिष्ठिर:।
तदा राजा नमस्कृत्य केशवं पुनरब्रवीत्॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन्! अश्वमेध यज्ञ के पश्चात् जब धर्मराज युधिष्ठिर ने पवित्र भस्म में स्नान किया, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम किया और इस प्रकार पूछने लगे।
 
Vaishampayanji said – King! After the Ashwamedha Yagya, when Dharmaraja Yudhishthir took the bath in the sacred ash, he bowed to Lord Krishna and started asking in this manner.
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