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श्लोक  14.93.d18 
तस्माद्धि त्वां प्रपन्नस्य त्वद्भक्तस्य च केशव।
युष्मदीयान् वरान् धर्मान् पुण्यान् कथय मेऽच्युत॥
 
 
अनुवाद
अतः हे केशव! हे अच्युत! मुझ भक्त को, जो आपकी शरण में आया है, कृपया अपना शुद्ध और उत्तम धर्म बताइए।
 
Therefore, O Keshav! O Achyuta! Please describe your pure and excellent Dharma to me, your devotee who has come seeking refuge in you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)