Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.92.47: जमदग्नि बोले, "क्रोध! मैंने तुम्हें साक्षात् देखा है। तुम निश्चिंत होकर यहाँ से जा सकते हो। तुमने मेरे प्रति कोई अपराध नहीं किया है, इसलिए आज मैं तुम पर क्रोधित नहीं हूँ।" 47 | mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जमदग्निरुवाच
साक्षाद् दृष्टोऽसि मे क्रोध गच्छ त्वं विगतज्वर:।
न त्वयापकृतं मेऽद्य न च मे मन्युरस्ति वै॥ ४७॥
अनुवाद
जमदग्नि बोले, "क्रोध! मैंने तुम्हें साक्षात् देखा है। तुम निश्चिंत होकर यहाँ से जा सकते हो। तुमने मेरे प्रति कोई अपराध नहीं किया है, इसलिए आज मैं तुम पर क्रोधित नहीं हूँ।" 47
Jamadagni said, "Anger! I have seen you personally. You may go from here without any worry. You have not done any crime to me; hence I am not angry with you today." 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥