Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.92.43: धर्म ने उन महर्षि की परीक्षा लेनी चाही। उसने सोचा, देखूँ तो सही, जब वे अप्रसन्न होते हैं, तो क्या करते हैं। इसीलिए उसने क्रोध के स्पर्श से दूध को दूषित कर दिया ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  14.92.43 
जिज्ञासुस्तमृषिश्रेष्ठं किं कुर्याद् विप्रिये कृते।
इति संचिन्त्य धर्म: स धर्षयामास तत् पय:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
धर्म ने उन महर्षि की परीक्षा लेनी चाही। उसने सोचा, देखूँ तो सही, जब वे अप्रसन्न होते हैं, तो क्या करते हैं। इसीलिए उसने क्रोध के स्पर्श से दूध को दूषित कर दिया ॥43॥
 
Dharma wanted to test that great sage. He thought, let me see what he does when he is displeased. That is why he contaminated the milk by the touch of anger. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)