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mahabharat 14.92.42: उस दूध को उसने एक नये पात्र में रखा जो दृढ़ और शुद्ध था। क्रोधरूपी धर्म उस पात्र में प्रविष्ट हो गया ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  14.92.42 
तत् पय: स्थापयामास नवे भाण्डे दृढे शुचौ।
तच्च क्रोधस्वरूपेण पिठरं धर्म आविशत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उस दूध को उसने एक नये पात्र में रखा जो दृढ़ और शुद्ध था। क्रोधरूपी धर्म उस पात्र में प्रविष्ट हो गया ॥42॥
 
He put that milk in a new vessel which was strong and pure. Dharma entered that vessel in the form of anger. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)