Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.92.31: यज्ञ, दीक्षा, होम और जो कुछ भी हम चाहते हैं, वह सब हमें यहीं मिलता है। न्यायपूर्वक अर्जित अन्न ही हमारा आहार है और हम सदैव अपने कर्तव्य में लगे रहते हैं॥31॥ | mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यज्ञं दीक्षां तथा होमान् यच्चान्यन्मृगयामहे।
न्यायेनोपार्जिताहारा: स्वकर्माभिरता वयम्॥ ३१॥
अनुवाद
यज्ञ, दीक्षा, होम और जो कुछ भी हम चाहते हैं, वह सब हमें यहीं मिलता है। न्यायपूर्वक अर्जित अन्न ही हमारा आहार है और हम सदैव अपने कर्तव्य में लगे रहते हैं॥31॥
Yajna, initiation, homa and whatever else we seek, we get it all here. Food earned through justice is our food and we are always engaged in our duties.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥