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mahabharat 14.92.2: हे ब्रह्मन्! आपने मुझसे न्यायपूर्वक प्राप्त सत्तू को उत्तम वृत्ति वाले ब्राह्मण को दान करने से होने वाले महान फल का वर्णन किया है। यह निःसंदेह सत्य है॥2॥   |   mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.92.2 
तस्योञ्छवृत्तेर्यद् वृत्तं सक्तुदाने फलं महत्।
कथितं तु मम ब्रह्मंस्तथ्यमेतदसंशयम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! आपने मुझसे न्यायपूर्वक प्राप्त सत्तू को उत्तम वृत्ति वाले ब्राह्मण को दान करने से होने वाले महान फल का वर्णन किया है। यह निःसंदेह सत्य है॥2॥
 
O Brahman! You have described to me the great benefits that one gets by donating the Sattu obtained justly to a Brahmin who has a noble attitude. This is undoubtedly correct.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)