Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.92.13: महर्षियों! प्रसिद्ध अगस्त्य ऋषि हमारे आश्रयदाता हैं। वे बिना किसी ईर्ष्या और भक्ति के साथ सबको अन्न देते हैं। किन्तु यहाँ तो बादल ही नहीं बरस रहे हैं। फिर भविष्य में अन्न कैसे उत्पन्न होगा?॥13॥ | mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अगस्त्यो यजमानोऽसौ ददात्यन्नं विमत्सर:।
न च वर्षति पर्जन्य: कथमन्नं भविष्यति॥ १३॥
अनुवाद
महर्षियों! प्रसिद्ध अगस्त्य ऋषि हमारे आश्रयदाता हैं। वे बिना किसी ईर्ष्या और भक्ति के साथ सबको अन्न देते हैं। किन्तु यहाँ तो बादल ही नहीं बरस रहे हैं। फिर भविष्य में अन्न कैसे उत्पन्न होगा?॥13॥
‘Maharishis! The famous sage Agastya is our patron. He gives food to everyone without any jealousy and with devotion. But the clouds are not raining here. Then how will food be produced in the future?॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥