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श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  14.92.11 
तथा ह्यनेकैर्मुनिभिर्महान्त: क्रतव: कृता:।
एवंविधे त्वगस्त्यस्य वर्तमाने तथाध्वरे।
न ववर्ष सहस्राक्षस्तदा भरतसत्तम॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उनके अतिरिक्त और भी अनेक ऋषियों ने महान यज्ञ किये थे। हे भरतश्रेष्ठ! जब महर्षि अगस्त्य का ऐसा ही यज्ञ चल रहा था, तब देवराज इन्द्र ने वहाँ वर्षा रोक दी।
 
Besides him, many other sages had performed great sacrifices. O best of the Bharatas! When such a sacrifice of Maharishi Agastya was underway, the king of gods Indra stopped the rain there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)