विश्वामित्रोऽसितश्चैव जनकश्च महीपति:।
कक्षसेनार्ष्टिषेणौ च सिन्धुद्वीपश्च पार्थिव:॥ ३५॥
एते चान्ये च बहव: सिद्धिं परमिकां गता:।
नृपा: सत्यैश्च दानैश्च न्यायलब्धैस्तपोधना:॥ ३६॥
अनुवाद
विश्वामित्र, असित, राजा जनक, कक्षसेन, अरिष्टसेन और सिंधुद्वीप के भूपाल - ये तथा अन्य अनेक राजा और तपस्वी न्यायपूर्वक अर्जित धन का दान करके तथा सत्य बोलकर परम सिद्धि को प्राप्त हुए हैं।
Viswamitra, Asita, King Janaka, Kakshasena, Arishtisena and Bhupal of Sindhudweep - these and many other kings and ascetics have attained the highest perfection by donating wealth earned through justice and by speaking the truth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)