Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.91.30: लोभ और मोह के वशीभूत होकर वह संग्रह करने की प्रवृत्ति अपनाता है। वह कंजूसी से धन इकट्ठा करने की सोचता है। फिर बुद्धि को मलिन करने वाले पापकर्मों द्वारा लोगों को उद्विग्न करता है।॥30॥ | mahabharat अध्याय 14.91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोभ और मोह के वशीभूत होकर वह संग्रह करने की प्रवृत्ति अपनाता है। वह कंजूसी से धन इकट्ठा करने की सोचता है। फिर बुद्धि को मलिन करने वाले पापकर्मों द्वारा लोगों को उद्विग्न करता है।॥30॥
Under the influence of greed and attachment, he adopts the mindset of hoarding. He miserly thinks of collecting money. Then he puts people into agitation by sinful acts which defile the intellect.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥