Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.91.29: जो ब्राह्मण पाप कर्मों से धन प्राप्त करके दुराचारी हो जाता है और आसक्ति तथा मोह से ग्रस्त हो जाता है, वह अन्त में कलंकित गति को प्राप्त होता है ॥29॥ | mahabharat अध्याय 14.91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो ब्राह्मण पाप कर्मों से धन प्राप्त करके दुराचारी हो जाता है और आसक्ति तथा मोह से ग्रस्त हो जाता है, वह अन्त में कलंकित गति को प्राप्त होता है ॥29॥
A Brahmin who, after acquiring wealth through sinful acts, becomes unruly and is overcome by attachment and infatuation, ultimately attains a tainted state. ॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥