श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  14.91.28 
धर्मवैतंसिको यस्तु पापात्मा पुरुषाधम:।
ददाति दानं विप्रेभ्यो लोकविश्वासकारणम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो पापी और नीच है, वह ब्राह्मणों को दान धर्म के लिए नहीं, अपितु लोक-सम्मान पाने के लिए देता है ॥28॥
 
He who is a sinner and a wretch gives donations to brahmins to gain public respect, not for the sake of religion. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)