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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा
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श्लोक 26
श्लोक
14.91.26
तस्याधर्मप्रवृत्तस्य हिंसकस्य दुरात्मन:।
दानेन कीर्तिर्भवति न प्रेत्येह च दुर्मते:॥ २६॥
अनुवाद
मूर्ख, दुष्ट और अधर्म में लिप्त हिंसक मनुष्यों द्वारा दिया गया दान उन्हें इस लोक में या परलोक में यश नहीं दिलाता ॥26॥
The charity given by foolish, wicked and violent people who indulge in unrighteousness does not bring them fame in this world or the next world. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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