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mahabharat 14.91.24: अतः किसी भी प्रकार का संदेह होने पर स्वयंभू भगवान प्रजापति के अतिरिक्त अन्य किसी ज्ञानी पुरुष को अकेले कोई निर्णय नहीं देना चाहिए ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 14.91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  14.91.24 
तस्मान्न वाच्यं ह्येकेन बहुज्ञेनापि संशये।
प्रजापतिमपाहाय स्वयम्भुवमृते प्रभुम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अतः किसी भी प्रकार का संदेह होने पर स्वयंभू भगवान प्रजापति के अतिरिक्त अन्य किसी ज्ञानी पुरुष को अकेले कोई निर्णय नहीं देना चाहिए ॥24॥
 
Therefore, in case of any doubt, no knowledgeable person other than Swayambhu Lord Prajapati should give any decision alone. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)