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mahabharat 14.91.15-16h: यदि तुम्हारी इच्छा हो, तो ब्राह्मणों द्वारा शास्त्र विधि से यह यज्ञ सम्पन्न कराओ। शास्त्रीय विधि से यज्ञ करने से तुम्हें महान धर्म की प्राप्ति होगी। 15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 91: हिंसामिश्रित यज्ञ और धर्मकी निन्दा  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  14.91.15-16h 
आगमेनैव ते यज्ञं कुर्वन्तु यदि चेच्छसि॥ १५॥
विधिदृष्टेन यज्ञेन धर्मस्ते सुमहान् भवेत्।
 
 
अनुवाद
यदि तुम्हारी इच्छा हो, तो ब्राह्मणों द्वारा शास्त्र विधि से यह यज्ञ सम्पन्न कराओ। शास्त्रीय विधि से यज्ञ करने से तुम्हें महान धर्म की प्राप्ति होगी। 15 1/2॥
 
If you wish, then the Brahmins should perform this yagya according to the scriptures. By performing Yagya according to the classical method, you will attain great religion. 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)